Tuesday, 19 January 2021

Guide (6-2-1965) hindi Movie

 गाइड (1965)  हिंदी मूवी

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निर्देशक: विजय आनन्द
लेखक: आर के नारायण
निर्माता: देव आनन्द
संगीतकार: सचिन देव बर्मन
छायाकार: फ़ाली मिस्त्री
अभिनेता: देव आनन्द,वहीदा रहमान,लीला चिटनिस, अनवर हुसैन,उल्हास,गजानन जागीरदार,रशीद ख़ान,
किशोर साहू,प्रवीन कौल,मृदुला रानी,पूर्णिमा,कृष्ण धवन,प्रेम सागर,नर्बदा शंकर,
संगीतकार: सचिन देव बर्मन
छायाकार: फ़ाली मिस्त्री
प्रदर्शन तिथि: 6-2-1965
भाषा: हिन्दी
देश: भारत

संक्षेप:-गाइड (1965)

आर,के, नारायण के अंग्रेजी उपन्यास के  अनुसार 6 फरवरी 1965 को बनी हिन्दी फिल्म "गाईड" अपने जमाने की बेहतरीन फिल्मों में से एक थी ।55 लाख के बजट से बनी फिल्म गाईड ने 1 करोड़ 75 लाख की  भारत में और दुनियां भर में 3 करोड़ 75 लाख की कमाई की । जिससे अपने फिल्म जगत में गाईड फिल्म कमाई करने में पाचवें स्थान पर रही । वैसे कहा जाए तो उस समय इस फिल्म ने 75 सप्ताह चलने का भी रिकॉर्ड प्लेटिनम जुबली  अपने नाम बनाया जो इस फिल्म से ज्यादा कमाई करने वाली  फिल्म "आरज़ू  और वक्त" नहीं बना सकी ।  
लता मंगेशकर,किशोर कुमार ,सचिन देव बर्मन,मन्ना डे और साथीयों की आवाज़ में गाए गए सदाबहार 10 गीतों

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1..गाता रहे मेरा दिल"
2.आज फिर जीने की तमन्ना है
3.दिन ढल जाये
4.पिया तोसे नैना लागे रे
5.सइंया बेईमान
6.तेरे मेरे सपने
7.वहाँ कौन है तेरा
8.हे राम हमारे रामचन्द्र
9.अल्लाह मेघ दे पानी दे
10.दिन ढल जाये

के साथ वर्तमान से शुरू होकर अतीत में चलती और फिर वर्तमान में आती फिलम की कहानी राजू गाइड (देव आनन्द) और पुरातत्वविद् मार्को (किशोर साहू) की युवा पत्नी रोज़ी (वहीदा रहमान) की लव स्टोरी और बूढे पुरातत्वविद् मार्को और रोज़ी के विवाहता जीवन की कहानी को दिखाती है ।

फिल्म "गाइड (1965)" से जुड़े कुछ आश्चर्यजनक तथ्य:-

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 गाईड 1965

1..गाईड देव आनंद की पहली रंगीन फिल्म थी ।
2..गाईड फिल्म के प्रीमियर में लगभग पूरे  फिल्म उद्योग ने भाग लिया था मगर किसी ने भी   
विजय आनंद को बधाई नहीं दी थी ।
3.गाइड फिल्म को रिलीज होने पर भी कोई रिस्पांस नहीं मिला था फिल्म की कुछ-कुछ बातें वक्त के आगे की थी जो उस समय लोगों की समझ दूर थी लेकिन धीरे-धीरे फिल्म की बारीकियां समझ आने लगी और फिल्म हिट साबित हुई ।
4.गाईड फिल्म कीहिरोईन पहले वैजयंती माला को लिया गया था लेकिन वैजयंती माला थोड़ी ५.गोलमटोल होने कारन देव आनंद के साथ फिट नहीं बैठ रही थी सो  वहीदा रहमान को लिया गया और देव आनंद और वहीदा रहमान की जोड़ी सुपर हिट रही मगर वहीदा रहमान ने फिर कभी भी किसी भी फिल्म में देव आनंद के साथ काम नहीं किया |
 5.गाईड फिल्म इंग्लिश में भी बनी थी, लेकिन इस तरह फ्लॉप हुई कि फिल्म को बाद में किसी भी डी.वी. डी (DVD) या किसी भी  वर्जन पर रिलीज नहीं किया गया । अगर आज गाईड फिल्म को इंग्लिश में देखना हो तो ये सर्च करने पर कहीं भी नहीं मिलेगी । 
6..आर,के, नारायण के उपन्यास अनुसार फिल्म के अंत में  गाइड की मौत  नहीं होती और बारिश भी नहीं होती है  |


वर्तमान से शुरू होती फिल्म में राजू (देव आनन्द) जेल से रिहा हो रहा और  फिर फिल्म की कहानी अतीत में चलती है ।  गाइड राजू पर्यटकों को ऐतिहासिक स्थलों में घुमाकर अपनी कमाई करता है और एक दिन, बूढ़ा पुरातत्वविद् मार्को (किशोर साहू) उनकी युवा पत्नी रोज़ी (वहीदा रहमान) जो के साथ शहर में आता है और गाइड के रूप में राजू को काम देता है।गुफाओं में कुछ शोध करना मार्को एक नई गुफा का पता लगाता है और  काम में इतना खो जाता है कि वो अपनी पत्नी रोज़ी पर ध्यान नहीं देता ।
एक दिन राजू रोज़ी को सैर सपाटे के लिए ले जाता है और रोज़ी उसे बताती है कि वह एक वेश्या की बेटी है । उसे नृत्य का जुनून है जो मार्को को सख़्त नापसंद है । 
 गुफाओं में रोज़ी जाती है तो देखती है कि मार्को एक आदिवासी लड़की के साथ प्रेम सम्बन्ध बना रहा होता है। जिसको  लेकर मार्को और रोज़ी के रिश्ते में दरार पैदा होती है है रोज़ी आत्महत्या आत्महत्या करने की कोशिश करती है लेकिन राजू उसे समझाता है कि आत्महत्या पाप है और  अपना सपना पूरा करने के लिए ज़िंदा रहना लाज़िम है ।
मार्को से सम्बन्ध तोड़ कर रोज़ी को सहारे की ज़रूरत होती है तो राजू उसे सहारा देता है। रोज़ी के वेश्या की बेटी होने के कारन समाज उसे नपसंद करता है । राजू की माँ (लीला चिटनिस) और मामा (उल्हास) उससे राजू को  रोज़ी को घर से बाहर निकाल देने के लिए आग्रह करते हैं लेकिन राजू मना कर देता है । राजू की मां ,मामा और  उसका मित्र और ड्राइवर ग़फ़्फ़ूर (अनवर हुसैन) रोज़ी को लेकर उससे किनारा कर लेते हैं । पूरा शहर उसके खिलाफ हो जाता है और राजू काम काज ख़त्म होने से   आमदनी ख़त्म हो जाती है । 
राजू रोज़ी को एक गायक और नृत्यांगना बनने के लिए प्रोत्साहित और उसकी मदद करता है ।  जिससे रोज़ी जल्द ही  एक स्टार बन जाती है । रोज़ी ऊँचाईयाँ को छूने लगती है और राजू  आवाराग़र्दी करने लगता है ।उसे नशे और  जुए  की लत लग जाती है ।
इसी बीच मार्को वापस आता है। वो  रोजी को वापस अपना बनाने की कोशिश करता है । मार्को  फूलों का गुलदस्ता लेकर रोजी को मिलने आता है लेकिन उसका  टकरा राजू से हो जाता है । मार्को राजू को फूलों का गुलदस्ता देता है और कहता है कि रोज़ी के कुछ गहने  जो एक लॉकर में जमा हैं  जिनको निकालने के लिए रोज़ी के हस्ताक्षर की ज़रूरत है । राजू सोचता है कि मार्को और रोज़ी के दोबारा मिलने से उनके अपस में फिर से  सम्बन्ध स्थापित ना हो जायें और वो खुद ही लॉकर के पेपरों में रोज़ी के जाली हस्ताक्षर  कर देता है । जब इस बात का पता लगने पर रोज़ी और राजू   के सम्बन्धों में खटास आ जाती है । राजू ने ऐसा कदम  पैसे की ख़ातिर नहीं बल्कि रोज़ी के प्यार में उठाया था इस बात को रोज़ी  समझ नहीं पाती  और जाली हस्ताक्षर  करने के जुर्म में राजू को दो साल की सज़ा हो जाती है।
फ़िल्म फिर वर्तमान में  आती है। रिहाई के दिन रोज़ी और राजू की माँ  राजू को जेल से लेने के लिए आते हैं लेकिन राजू को छः महीने पहले ही रिहा हो कर कहीं और चला गया है ।रोज़ी और राजू की माँ निराश होकर एक दूसरे की तरफ देखते हैं और बर लौट जाते हैं।
गरीबी, निराशा, भूख और अकेलेपन के कारण रिहाई होने के बाद इधर-उधर भटकता  अकेला भटकता राजू साधुओं की टोली के साथ एक छोटे से एक गाँव में  पुराने मंदिर के अहाते में सो जाता है । एक साधु सोते हुये राजू के ऊपर पीताम्बर वस्त्र उढ़ा देता है ।
उस गांव में रहने वाला भोला नाम का एक किसान राजू को साधु समझ लेता है और शादी न करने की ज़िद कर रही अपनी बहन को राजू के पास लाता है ।राजू उसे समझा-बुझाकर शादी करने के लिए राज़ी कर देता है। यह बात पूरे गांव में फैल जाती  है और  गांव वाले बी  राजू को साधु मान लेते हैं ।  राजू  गांव में स्वामी जी के नाम से जाना जाने लगता हैइस बीच राजू का गांव के पण्डितों से भी मतभेद भी होता हैं ।
एक दिन कहानी सुनाते हुये राजू गांव वालों एक साधु के बारे में बताता है कि गांव में अकाल पड़ जा ने पर उस  साधु के १२ दिन का  उपवास रखने से गांव में बारिश होती है ।
उस गांव में भी संयोग से अकाल पड़ जाता है। राजू से वार्तालाप करते एक आदमी को कुछ और सुनता  है । वो गांव वालों को बताता है कि वर्षा के लिए स्वामी जी ने  १२ दिन का उपवास करने का निर्णय लिया है। उसका विरोध करता  राजू भोला को अपनी सारी कहानी बताता  है ।




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